Sunday, 6 August 2017

शारीरिक संबंध शास्त्रों के अनुसार





शास्त्रों के अनुसार रात 12 बजे बाद अगला दिन शुरु हो जाता है तथा ब्रह्मबेला से ठीक पहले वाला समय आरंभ हो जाता है। ऐसे समय पर व्यक्ति की मानसिक तथा आध्यात्मिक शक्तियां जागृत हो जाती हैं। इसीलिए मध्यरात्रि के एक प्रहर बाद से ब्रहम मुहूर्त आरम्भ हो जाता है ऐसे समय में व्यक्ति को अध्ययन, मनन, ध्यान तथा भगवान की पूजा-पाठ जैसे कार्य करने चाहिए। कोई नई योजना बनानी हो तो भी उसके लिए यह समय बहुत उपयुक्त है। परन्तु इस समय भूल कर भी शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए अन्यथा पुरुषत्व की हानि होने के साथ-साथ व्यक्ति का बुरा समय आरंभ हो जाता है। शारीरिक संबंध बनाने के लिए सर्वोत्तम समय बह्म मुहूर्त के प्रहर से पहले (अर्थात् सुबह 3 बजे से पहले) का ही ठीक माना जाता है

नींबू-लौंग




तांत्रिक ग्रंथों में कई ऐसे प्रयोगों के बारे में बताया गया हैजिनकी मदद से असंभव कार्य को भी संभव बनाया जा सकता है। इन प्रयोगों में विशेष पौधे, पूजा सामग्री, फल तथा अन्य चीजों का उपयोग होता है। तंत्र के अनुसार नींबू तथा लौंग के टोने-टोटके द्वारा जीवन की कई समस्याओं को एक झटके में खत्म किया जा सकता है।
यदि घर में किसी बच्चे या बड़े व्यक्ति को बुरी नजर लग जाए तो उसके सिर से पैर तक सात बार नींबू वार लें। इसके बाद इस नींबू के चार टुकड़े करके किसी सुनसान स्थान या किसी तिराहे पर फेंक दें। ध्यान रखें नींबू के टुकड़े फेंकने के बाद पीछे न देखें और सीधे घर आ जाएं। नजर तुरंत दूर हो जाएगी।
यदि किसी व्यक्ति का व्यापार ठीक से नहीं चल रहा है तो उसे शनिवार के दिन नींबू का तांत्रिक उपाय करना चाहिए। इस उपाय के अनुसार एक नींबू को दुकान की चारों दीवारों से स्पर्श कराएं। इसके बाद नींबू को चार टुकड़ों में अच्छे से काट लें और चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में नींबू का एक-एक टुकड़ा फेंक दें। इससे दुकान, व्यापार स्थल की नेगेटिव एनर्जी नष्ट हो जाएगी।
घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए घर में नींबू का पेड़ लगाए। नींबू के पेड़ से आसपास का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है। इसके साथ ही नींबू का पेड़ घर में लगाने से घर का वास्तु दोष भी दूर होता है।
प्रचलित मान्यता के अनुसार अगर सुई लगा नींबू किसी बीमार के सिर पर से 7 बार वार (उसार) कर चौराहे पर रख देना चाहिए। चौराहे से जाते हुए जो भी व्यक्ति उस नींबू को पार कर चला जाएगा या उसे स्पर्श करेगा तो बीमार व्यक्ति की सारी बीमारी उसको को लग जाती है।
यदि कोई व्यक्ति अचानक ही बीमार हो जाए तथा उस पर दवाओं का कोई असर न हों तो इसके लिए भी नींबू का उपाय किया जाता है। ऐसी स्थिति में एक साबूत नींबू के उपर काली स्याही से 307 लिख दें और उस व्यक्ति के उपर उल्टी तरफ से 7 बार उतारें। इसके पश्चात उसी नींबू को चार भागों में इस प्रकार से काटें कि वह नीचें से जुड़े रहें। और फिर उसी नींबू को घर से बाहर किसी निर्जन स्थान पा फेंक दें। इस उपाय को करने से पीडि़त व्यक्ति 24 घंटों के अंदर ही स्वस्थ हो जायेगा।
 हर हर महादेव
 6/8/17
16:15
अहमदगढ यदि इस प्रकार की कोई भी समस्या के लिए संपर्क करे...आपको अवश्य ही लाभ होगा
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यदि आप पर आप पर तंत्र शक्ति प्रयोग की गई है किस तरह से पहचाने




(1) नाड़ी की गति सामान्य से अधिक हो जाती है: जब भी शरीर पर किसी भी नकारात्मक ऊर्जा का हमला होता है तो हमारा शरीर उसका प्रतिरोध करता है जिसके फलस्वरूप हमारी धड़कन सामान्य से तेज हो जाती है। जितना घातक अटैक होगा, नाड़ी की गति उतनी ही ज्यादा तेज हो जाएगी।
(2) श्वास की गति बढ़ जाती है: तांत्रिक हमला होते ही सांस की गति भी बहुत तेज हो जाती है। घातक हमले की हालत में श्वास की गति इतनी अधिक हो सकती है जितनी की भागदौड़ के बाद भी नहीं होती।
(3) अचानक ही शारीरिक तथा मानसिक रूप से कमजोरी महसूस करना: तांत्रिक हमले या साईकिक अटैक में नकारात्मक शक्तियां व्यक्ति के मन-मस्तिष्क को काबू में करने का प्रयास करती है जिसके चलते व्यक्ति अपनी शक्ति काम नहीं ले पाता और वह अंदर ही अंदर शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोरी महसूस करने लगता है।
(4) रात को डरावने सपने आते हैं: तांत्रिक हमले के दौरान रात को सोते समय भयावह और डरावने सपने आने लगते हैं। कई बार ऎसा लगता है जैसे कि आप पर किसी जानवर ने हमला कर दिया या आप कहीं बहुत ऊंचाई से गिर गए हैं।
(5) पलंग के पास पानी रखने से भी पता चलता है: रात को सोते समय पलंग के पास पानी का एक गिलास रख दें और सोते समय मन में सोचे कि आपके अंदर की नकारात्मक ऊर्जा उस पानी में जा रही है। सुबह उस पानी को किसी छोटे पौधे में डाल दें। ऎसा लगातार आठ दिन तक करें। आठ दिन में वह पौधा मुरझा जाएगा। यदि हमला बहुत तेज हुआ तो पौधा 2-3 दिन में ही कुम्हला जाएगा।
(6) तकिए के नीचे नींबू रखें: फल तथा सब्जियां भी नकारात्मक ऊर्जा से अत्यधिक प्रभावित होते हैं। आप रात को सोते समय एक नींबू अपने तकिए के नीचे रख दें और अपने मन में सोचे कि आपके आस-पास कोई भी नकारात्मक ऊर्जा है तो वह इस नींबू में आ जाएं। तांत्रिक हमला होने की दशा में सुबह आप उस नींबू को मुरझा हुआ पाएंगे। उसका रंग भी काला पड़ जाएगा...

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हर हर महादेव
 6/8/17
15:54
अहमदगढ

बैद्यनाथ ज्योर्तिलिंग.....



इसकी कथा बैद्यनाथ ज्योर्तिलिंग के प्रकट होने से अद्भूत चरित्र वाले चरवाहा बैजू की असीम शिवभक्ति से जुड़ी हुई है। बाबा बैद्यनाथ धाम अपने पीछे एक लंबा इतिहास लिए खड़ा है। ब्रह्म के पौत्र एवं पुलस्त्य के पुत्र विश्रवा की तीन पत्‍ि‌नयां थी। पहली पत्‍‌नी के गर्भ से धनपति कुबेर, दूसरी पत्‍‌नी द्वारा रावण तथा कुंभकरण तथा तीसरी पत्‍‌नी द्वारा हरिभक्त विभीषण का जन्म हुआ। चारों पुत्रों में से रावण अत्यंत बलवान और बुद्धिमान थे। रावण कैलाश पर्वत पर जाकर शिवजी की तपस्या करने लगे लेकिन बहुत समय बीत जाने के बाद भी शिवजी उन पर प्रसन्न नहीं हुए। बाद में रावण वहां से हट कर हिमालय पर्वत पर पुन: उग्र तपस्या करने लगे फिर भी उन्हें शिव के दर्शन नहीं मिले। यह देख रावण अत्यंत चिंतित हो गए और अपने अपार बल तथा शरीर को धिक्कारने लगे। अब उन्होंने हवन करना आरंभ किया। जब उससे भी शिव जी प्रसन्न नहीं हुए तब उन्होंने सोचा कि अब अपने शरीर को अग्नि में भेंट कर देना चाहिए। ऐसा सोच कर उसने दस मस्तकों में से एक-एक को काट कर अग्नि में हवन करने लगे। जब नौ मस्तक कट चुका और दसवें मस्तक को काटने के लिए तैयार हुए तो शिवजी प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुए। शिवजी ने उनके हाथ पकड़ लिए और वर मांगने को कहा। शिव की कृपा से उनके सभी मस्तक अपने अपने स्थान से जुड़ गए। हाथ जोड़ कर प्रार्थना करते हुए रावण ने वर मांगा- हे प्रभो! मैं अत्यंत पराक्रमी होना चाहता हूं। आप मेरे नगर में चल कर निवास करें। यह सुन कर शिवजी बोले- हे रावण! तुम हमारे लिंग को उठा कर ले जाओ और इसका पूजन किया करो परंतु यदि तुमने लिंग को मार्ग में कहीं रख दिया तो वह वहीं पर स्थित हो जाएगा।

रावण के कहने पर शिवजी दो रूपों में विभाजित हो गए और दो लिंग स्वरूप धारण किए। रावण उन दोनों शिवलिंगों को कांवर में रख कर चल पड़े। कुछ दूर चलने के बाद रावण को लघुशंका करने की इच्छा हुई। रावण लघुशंका निवारण के लिए अत्यंत व्याकुल हो उठा और किसी व्यक्ति की तलाश करने लगा जो कुछ देर तक कांवर को उठाए रखे। उसी समय वहां एक चरवाहा दिखाई दिया। रावण ने उससे प्रार्थना किया कि कुछ देर तक कांवर को अपने कंधों पर उठाये रखे जिससे मैं लघुशंका कर लूं। चरवाहे ने उत्तर दिया- हे रावण! मैं दो घड़ी इस कांवर को लिए रहूंगा। यदि इस समय के अन्दर तूने कांवर को न लिया तो मैं इसे जमीन पर रख दूंगा। इतना सुन कर रावण उसे कांवर देकर लघुशंका करने बैठ गया। रावण के अहंकार को नष्ट करने के लिए वरूण ने उसका मूत्र इतना अधिक बढ़ा दिया कि उस चरवाहे ने कांवर का भार सहन नहीं कर पाया और कांवर को जमीन पर रख दिया। पृथ्वी पर रखते ही शिवलिंग उसी स्थान पर दृढ़ता पूर्वक जम गए। लघुशंका से उठने के बाद रावण ने उन लिंगों को उठाने का अथक प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो सका और अंत में निराश होकर घर लौट आया। रावण के चले जाने पर सभी देवताओं ने आकर वहां शिवलिंग की पूजा की। शिवजी ने प्रसन्न होकर उन्हें अपना दर्शन दिया और वर मांगने को कहा। सभी देवताओं ने प्रार्थना करते हुए उनसे कहा- हे स्वामी! आप हमें अपनी भक्ति प्रदान करें और कृपा पूर्वक सदैव यहीं स्थित रहें। आप मनुष्यों को वैद्य के समान आनंद प्रदान करने वाले हैं अस्तु आपका नाम बैद्यनाथ है।

अब वह चरवाहा जिसने रावण के कहने पर कांवर उठा कर रखा था नित्यदिन लिंग की पूजा करने लगा। उसका नाम बैजू था। जब तक वह उस लिंग की पूजा नहीं कर लेता तब तक भोजन नहीं किया करता था। अनेक प्रकार के विघ्न आने पर भी उसने अपना नियम कभी नहीं छोड़ा अन्तत: एक दिन उसकी दृढ़ भक्ति को देख कर वामांग में भगवती गिरिजा से सुशोभित शिवजी ने उन्हें दर्शन दिया और उसे वर मांगने को कहा। प्रेम की अधिकता में भर कर उस चरवाहे बैजू ने कहा-हे प्रभु! आपके चरणों में मेरा प्रेम बढ़ता रहे और मैं आपके भक्तों की सेवा किया करूं और आप मेरे नाम से प्रसिद्ध हों। शिवजी एवमस्तु कह कर उस लिंग में प्रवेश कर गए। तब से बाबा बैद्यनाथ को संसार बाबा बैजनाथ के नाम से भी जाना जाने लगा।

हर हर महादेव
 6/8/17
15:54
अहमदगढ