Tuesday, 8 August 2017

किस दिशा में होगी ससुराल कुंडली में देखे ?



ससुराल कि दिशा व स्थान का निर्धारण कुंडली में
शुक्र कि स्थिति से किया जाता है| शुक्र यदि शुभ
स्थान, राशि में हो व कोई भी पाप ग्रह उसे नहीं देख
रहा हो तो ससुराल स्थानीय या आसपास होती है|
यदि चतुर्थ भाव, चतुर्थेश व शुक्र किसी पाप ग्रह से
देखे जा रहे हों या शुक्र 6 , 8 , 12 वें भाव में हो तो जन्म
स्थान से दूर कन्या का ससुराल होता है| विवाह
जन्म स्थान से किस दिशा में होगा इसका निर्धारण भी
शुक्र से ही किया जाता है| कुंडली में जहां शुक्र स्थित है
उस से सातवें स्थान पर जो राशि स्थित है उस राशि के
स्वामी की दिशा में ही विवाह होता है| ग्रहों के
स्वामी व उनकी दिशा निम्न प्रकार है:-
राशि स्वामी दिशा
मेष, वृश्चिक मंगल दक्षिण
वृषभ , तुला शुक्र अग्नि कोण (दक्षिण-पूर्व)
मिथुन, कन्या बुध उत्तर
कर्क चंद्रमा वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)
सिंह सूर्य( पूर्व)
धनु, मीन गुरु ईशान (उत्तर-पूर्व)
मकर, कुम्भ शनि (पश्चिम)
मतान्तर से मिथुन के स्वामी राहु व धनु के स्वामी केतु
माने गए हैं तथा इनकी दिशा नैऋत्य (दक्षिण- पश्चिम) कोण मानी गयी है| उदाहरण के लिए किसी कन्या का जन्म लग्न मेष है व शुक्र उसके पंचम भाव में बैठे हैं तो शुक्र से 7 गिनने पर
11 वां भाव आता है, जहां कुम्भ राशि है| इसके
स्वामी शनि हैं| राशि कि दिशा पश्चिम है| इसलिए
इस कन्या का ससुराल जन्म स्थान से पश्चिम दिशा
में होगा| कन्या के पिता को चाहिए कि वह इस
दिशा से प्राप्त विवाह प्रस्तावों पर प्रयास करें ताकि समय
व धन की बचत हो|

अपने कुलदेवता को कैसे जाने ?




आज के समय में बहुतायत में पाया जा रहा है की लोगों को अपने कुलदेवता/देवी का पता ही नहीं है |वर्षों से कुलदेवता/देवी को पूजा नहीं मिल रही है |घर-परिवार का सुरक्षात्मक आवरण समाप्त हो जाने से अनेकानेक समस्याएं अनायास घेर रही हैं |नकारात्मक उर्जाओं की आवाजाही बेरिक टोक हो रही है |वर्षीं से स्थान परिवर्तन के कारण पता ही नहीं है की हमारे कुलदेवता/देवी कौन है |कैसे उनकी पूजा होती है |कब उनकी पूजा होती है |आदि आदि |इस हेतु एक प्रभावी प्रयोग है जिससे यह जाना जा सकता है की आपके कुलदेवता कौन है | यह एक साधारण किन्तु प्रभावी प्रयोग है जिससे आप अपने कुलदेवता अथवा देवी को जान सकते हैं |

 प्रयोग को मंगलवार से शुरू करें और ११ मंगलवार तक करते रहें | मंगलवार को सुबह स्नान आदि से स्वच्छ पवित्र हो अपने देवी देवता की पूजा करें |फिर एक साबुत सुपारी लेकर उसे अपना कुलदेवता/देवी मानकर स्नान आदि करवाकर ,उस पर मौली लपेटकर किसी पात्र में स्थापित करें |इसके बाद आप अपनी भाषा में उनसे अनुरोध करें की "हे कुल देवता में आपको  जानना चाहता हूँ ,मेरे परिवार से आपका विस्मरण हो गया है ,हमारी गलतियों को क्षमा करते हुए हमें अपनी जानकारी दें ,इस हेतु में आपका यहाँ आह्वान करता हूँ ,आप यहाँ स्थान ग्रहण करें और मेरी पूजा ग्रहण करते हुए अपने बारे में हमें बताएं |इसके बाद उस सुपारी का पंचोपचार पूजन करें |अब रोज रात को उस सुपारी से प्रार्थना करें की हे कुल्द्वता/देवी में आपको जानना चाहता हूँ ,कृपा कर स्वप्न में मार्गदर्शन दीजिये |फिर सुपारी को तकिये के नीचे रखकर सो जाइए |सुबह उठाकर पुनः उसे पूजा स्थान पर स्थापित कर पंचोपचार पूजन करें |यह क्रम प्रथम मंगलवार से ११ मंगलवार तक जारी रखें |हर मंगलवार को व्रत रखें |इस अवधि के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखें ,यहाँ तक की बिस्तर और सोने का स्थान तक शुद्ध और पवित्र रखें |ब्रह्मचर्य का पालन करें और मांस-मदिरा से पूर्ण परहेज रखें |  इस प्रयोग की अवधि के अन्दर आपको स्वप्न में आपके कुलदेवता/देवी की जानकारी मिल जायेगी |अगर खुद न समझ सकें तो योग्य जानकार से स्वप्न विश्लेषण करवाकर जान सकते हैं |इस तरह वर्षों से भूली हुई कुलदेवता की समस्या हल हो जाएगी और पूजा देने पर आपके परिवार की बहुत सी समस्याएं समाप्त हो जायेंगी

उपयोग करें यह बहुत अच्छा महसूस करवा़येगी
जय श्री कृष्ण

कर्पूर दिव्य वानस्पतिक



कर्पूर एक उड़नशील दिव्य वानस्पतिक पदार्थ है। इसे अक्सर पुजा में आरती करते वक्त जलाया जाता है ।
शास्त्रो के अनुसार देवी-देवताओं के समक्ष कर्पूर जलाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

प्रतिदिन सुबह और शाम कर्पूर को गाय के घी में भिगोकर जलाएं और संपूर्ण घर में उसकी खुशबू फैलाएं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक उर्जा नष्ट हो जाएगी। घर मे सकारात्मक उर्जा का निर्माण होगा, अमन शांति बनी रहेगी है।

इसकी सुगंध से बीमारी फैलाने वाले जीवाणु नष्ट होते हैं, और वातावरण शुद्ध होता है।
घर के किसी स्थान पर वास्तु दोष निर्मित हो तो वहां कर्पूर की 2 टिकिया रख दें। जब वह टिकिया समाप्त हो जाए तब फिर दूसरी टिकिया रख दें। ऐसा करने से वास्तुदोष निर्मित नहीं होगा।

नकारात्मक उर्जा से घर को बचाने के लिए शौचालय और बाथरूप में कर्पूर की टिकियां अवश्य रखें ।

 उपयोग करें यह बहुत अच्छा महसूस करवा़येगी
जय श्री कृष्ण