Tuesday, 22 August 2017

ज्योतिष " पीड़ा "विश्वासघात

आज कल के परतिसपरधातमक युग में हर कोई अपने आप को लेकर कुछ न कुछ करके कामयाब होना चाहता है चलो आज ईसी पर बात करते हैं
"विश्वासघात ,पीड़ा और ज्योतिष "

।। कभी मुझको साथ लेकर कभी मेरे साथ चलकर।
वो बदल गये अचानक मेरी जिंदगी बदलकर ।।

दोस्त, और अपने जब बदलते है इक टीस, खलिश,पीड़ा दे जाते है,मगर धोखा खाते कौन है,?तड़पन पाते कौन है,विरह और विछोह की अगन में जलता कौन है?

ज्योतिषशास्त्र यहाँ भी कभी मात नही खाता:--

अपने बदलते है तो चोट लगती कहा है, मन,दिल,दिमाग मे ही ना ।

कुछ आजमाये हुए ज्योतिषीय सूत्र :-

 1.कुंडली का चतुर्थ भाव,चतुर्थेश कमज़ोर, पीड़ित, पाप मध्य हो,पाप और क्रूर ग्रह यहां हो इंसान का दिल तड़फता,और रोता है,।कई बार भले ही वो सभी को हंसता,मुस्कराता ही दिखता हो, कोई पीड़ा उसे सालती ज़रूर है।ये पीड़ा अधिकांश अपने और बहुत अपने ही देते है।

2,पंचम भाव,पंचमेश,कमज़ोर,
पीड़ित,पाप मध्य हो या/ और पाप,क्रूर ग्रह यहां हो तो आघात,पीड़ा मानसिक हो जाती है।अक्सर प्रेम,प्रणय सम्बन्धो में,( और शेयर बाज़ार पर भरोसा कर के भी) धोखा ऐसे जातक ही खाते है।

ये और बात है कि-
" अहले दिल यूं भी निभा लेते है ,
दर्द सिने में छुपा लेते है"।

मेरे जो मित्र ज्योतिष की इन क्लिष्ट बातो का आनन्द ना ले पाये हो उनसे क्षमा चाहता हूं।
 आपके जीवन मे शुभता आये
पं मोहन

No comments:

Post a Comment