Tuesday, 22 August 2017

जन्म पत्रिका और पितृ दोष.....


जन्म पत्रिका में लग्न ,पंचम ,अष्टम और द्वादश भाव से पितृदोष
का विचार किया जाता है |पितृ दोष में ग्रहों में मुख्य रूप से सूर्य
,चन्द्रमा ,गुरु ,शनि ,और राहू -केतु की स्थितियों से पितृ
दोष का विचार किया जाता है |इनमें से भी गुरु ,
शनि और राहु की भूमिका प्रत्येक पितृ दोष में
महत्वपूर्ण होती है |
इनमें सूर्य से पिता या पितामह , चन्द्रमा से माता या मातामह ,मंगल
से भ्राता या भगिनी और शुक्र से पत्नी का
विचार किया जाता है |अधिकाँश लोगों की जन्म पत्रिका में
मुख्य रूप से क्योंकि गुरु ,शनि और राहु से पीड़ित होने
पर ही पितृ दोष उत्पन्न होता है ,इसलिए विभिन्न
उपायों को करने के साथ साथ व्यक्ति यदि पंचमुखी
,सातमुखी और आठ मुखी रुद्राक्ष
भी धारण कर ले , तो पितृ दोष का निवारण
शीघ्र हो जाता है |पितृ दोष निवारण के लिए इन
रुद्राक्षों को धारण करने के अतिरिक्त इन ग्रहों के अन्य उपाय जैसे
मंत्र जप और स्तोत्रों का पाठ करना भी श्रेष्ठ होता
है |

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