Tuesday, 22 August 2017

।। मृत्यु, ज्योतिष और मारकेश ।।



 अक्सर ज्योतिषी किसी की कुंडली मे मारकेश की दशा,अंतर्दशा देखते ही सामने बैठे परामर्श लेने आये व्यक्ति की सांसें अटका देते है यह कह कर कि "मारकेश चल रहा है,जीवन को खतरा है"।
  जबकि शास्त्र कहते है:-
 "व्यथा दुःख भयं, लज्जा, रोगः शौकस्तथैव च।
    मरणं चापमानं   च   मृत्युरष्टविधः स्मृतः।।

अर्थात मृत्यु के आठ रूप है
1 व्यथा
2 लगातार दुःखों से त्रस्तता
3 सदैव शत्रुओं से भय
4 हर जगह लज़्ज़ित
5असाध्य रोग से पीड़ित
6अनवरत शोक(प्रियजनों की मृत्यु से)
7 देह से प्राण निकलना
8 भरी सभा मे अपमानित होना

मारक दशा,अंतर्दशा में इनमे से किसी घटना/दुर्घटना के अवसरों से पाला पड़ता है इसलियें मृत्यु का डर दिखाने से ज्योतिषी को बचना चाहिये।
  ।।सुप्रभात।।
ज्योतिष, तांत्रिक निराकरण हेतु संपर्क

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