"यस्य नास्ति खलु जन्मपत्रिका या शुभाशुभफलप्रदायिनी।
अन्धकं भवति तस्य जीवितं दीपहिनमिव मन्दिरमं निशि।।
संस्कृत के इस सुंदर श्लोक में कहा गया है कि
" शुभ और अशुभ फल को बतलाने वाली जन्मपत्री जिस मनुष्य की नही बनी है,उसका जीवन अन्धे के जैसा है या की ऐसे घर, मंदिर समान जिसमे रात में दिया ना जला हो।"
जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में विश्वास ना हो या जिनका वास्ता ही स्वयम्भू ज्योतिष सम्राटों से,ठगों से पड़ा हो , वो हज़ारों तर्क दे सकते है कि ये सब अवैज्ञानिक है,झूठजाल है मगर उनकी भी कमी नही है जिन्हें इस शास्त्र के ज्ञाताओं ने बार बार संकट से उबारा है।
नई पीढ़ी से यही विनती है बगैर धर्म,जाति, सम्प्रदाय की गणित में उलझे जन्मपत्री बनवा ज़रूर ले,हमारी सांस्कृतिक धरोहर है ये ज्ञान भी।
अन्धकं भवति तस्य जीवितं दीपहिनमिव मन्दिरमं निशि।।
संस्कृत के इस सुंदर श्लोक में कहा गया है कि
" शुभ और अशुभ फल को बतलाने वाली जन्मपत्री जिस मनुष्य की नही बनी है,उसका जीवन अन्धे के जैसा है या की ऐसे घर, मंदिर समान जिसमे रात में दिया ना जला हो।"
जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में विश्वास ना हो या जिनका वास्ता ही स्वयम्भू ज्योतिष सम्राटों से,ठगों से पड़ा हो , वो हज़ारों तर्क दे सकते है कि ये सब अवैज्ञानिक है,झूठजाल है मगर उनकी भी कमी नही है जिन्हें इस शास्त्र के ज्ञाताओं ने बार बार संकट से उबारा है।
नई पीढ़ी से यही विनती है बगैर धर्म,जाति, सम्प्रदाय की गणित में उलझे जन्मपत्री बनवा ज़रूर ले,हमारी सांस्कृतिक धरोहर है ये ज्ञान भी।

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